Thursday, October 21, 2021
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सड़क किनारे अचार बेचकर कैसे करोड़पति बनीं कृष्णा यादव, आज 5 कंपनियों की मालकिन, टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से ज्यादा

दोस्तों आज हम कृष्णा जी की ऐसी सच्ची कहानी लेकर आएं है जो आपकी भी हो सकती है क्योंकि अक्सर फर्श से अर्श पर, शुन्य से शिखर पर पहुँचने की कहानी ऐसी ही होती है| सच में किसी ने कहा है “ कौन कहता है आसमां में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों”

krishna yadav
Krishna yadav

दोस्तों आप इनके साथ मिलकर, इनसे प्रोडक्ट खरीदकर होलसेल और रिटेल में बेच सकते हैं या आप उनसे ट्रेनिंग लेकर आप अपना नया बिज़नेस शुरू करके भी बहुत अच्छा मुनाफा कमा सकते है और कृष्णा जी की तरह समाज में एक अलग मुकाम बना सकते हैं|

कृष्णा यादव ने साबित कर दिखाया की अगर आप में जूनून है तो शुरुआत भले ही छोटी हो लेकिन कोशिशें ईमानदारी से की जायें तो सफलता मिलकर रहती है|

कृष्णा यादव ने 500 रुपए से अपना काम शुरू किया था आज 5 से 7 कम्पनियों की मालकिन है और सालाना 5 करोड़ से ज्यादा का टर्न ओवर है|

आज से 30 साल पहले की बात है|  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कृष्णा यादव के परिवार के पास खाने तक के पैसे नहीं थे| उनके पति ने गाड़ी का बिज़नेस शुरू किया था वह भी नहीं चला और घर मकान सारा बिक गया| उस समय कृष्णा जी  के तीन छोटे छोटे बच्चे थे|

कृष्णा जी ने सोचा यहाँ रहेंगे तो लोग लाखो सवाल करेंगे की आपके हालात ऐसे कैसे हो गये यह सोचकर उन्होंने अपने रिश्तेदार से 500 रुपए उधiर लेकर अपने पति को दिल्ली भेजा और कहा की आप कोई भी छोटी सी नौकरी खोज लिजिए हमलोग भी दिल्ली में आकर रहेंगे| लेकिन पति को 2 से 3 महीने तक कोई नौकरी नहीं मिली तो कृष्णा जी अपने बच्चों को लेकर दिल्ली आ गई| कृष्णा जी एक किसान परिवार से थी वह कभी स्कूल नहीं गयी थी लेकिन अपने माँ-दादी के साथ खेतों में खूब काम करती थी|

नजफगढ़ में  कुछ खेत किराए पर लेकर सब्जी की खेती शुरू किया और सब्जियां बेचने लगे जिससे थोड़ी बहुत कमाई होने लगी| लेकिन सब्जियां बहुत ज्यादा होती थी तो कभी कभी घर में रखे रखे ख़राब हो जाती थी| उस समय तक घर में बच्चो के लिए टीवी आ गया था जिसमे दूरदर्शन के चैनल पर कृषि दर्शन देखा करते थे उसमे किसानो की आय बढ़ाने के प्रोग्राम दिखाते थे| उसमे यह भी बताया जाता था की आप कृषि विज्ञान केंद्र में निःशुल्क अचार बनाना सीख सकते है और उसे मार्किट में बेचकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं|

कृष्णा जी के खेतों में बहुत सारी सब्जियां बच जाती थी तो उन्होंने सोचा इन सब सब्जियों का अचार बनाया जा सकता है तो उन्होंने अपने पति से कहा की आप पता लगाओ की अचार बनाने की ट्रेनिंग कहाँ मिलती है?

काफी जगह पता लगाने के बाद पता चला की कृषि विज्ञान केंद्र में कोई भी बेरोजगार जाकर नि:शुल्क ट्रेनिंग ले सकता है। यह सेंटर उजवा नाम की जगह पर था। कृष्णा जी वहां गयी और उन्हें बताया कि मुझे अचार बनाने की ट्रेनिंग लेना है। वहां से कृष्णा जी अचार-मुरब्बा बनाना सीख गई। इसके बाद घर में अचार बनाना शुरू कर दिया।

krishna pickles

उन्होंने कहा की शुरू में दो किलो बनाया, लेकिन अचार बिक नहीं रहा था। पति दुकानों पर लेकर गए तो उन्होंने कहा कि हम खुला अचार नहीं खरीदते है  वो निराश होकर घर आ गए और कृष्णा जी से बताया की कोई भी दुकानदार अचार लेने के लिए तैयार नहीं है| उन्हें बहुत गुस्सा भी आया| उन्होंने सोचा अच्छी-खासी सब्जी बिक रही थी, ये अचार के चक्कर में सब्जी भी खराब हो गई।

फिर कृष्णा जी ने सोचा क्यों न सब्जी के साथ अचार भी बेचा जाए| उन्होंने अपने पति से कहा कि आप सड़क किनारे टेबल पर सब्जी के साथ साथ अचार भी रखकर बेचो| बहुत सारे लोग उस  सड़क से निकलते हैं, वे अचार जरुर खरीदेंगे। उनके पति ने ऐसा ही किया। लेकिन ज्यादा लोग नहीं रूकते थे तो हमने सोचा की लोगो को पानी पीने के लिए दो मटके रखते है लोग पानी पीने के लिए जरुर रुकेंगे। जो लोग सब्जियों के लिए रुकते थे, या पानी पीने के लिए रूकते थे हम उन्हें थोड़ा सा अचार टेस्ट करने के लिए देते थे। उनसे कहते थे कि अच्छा लगे तो फिर आप ऑर्डर दीजिएगा।

कृष्णा जी के अचार का स्वाद घर के जैसा तो था लोगो को बहुत पसंद आया और उन्हें आर्डर मिलने लगे

कृष्णा जी  बताती हैं- धीरे-धीरे ही सही लोगो को ये अचार बहुत पसंद आया क्योंकि मै ये सारे अचार खुद से तैयार करती थी और बाज़ार से सारे मसाले लाकर सिलबट्टे में तैयार करती थी। जिससे अचार बहुत स्वादिष्ट होते थे| उस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि मसालो को चक्की में कूटवा पिसवा सकें। जब बच्चे स्कूल से आते थे तो उन्हें भी इसी काम में लगा लेती थी। मेरे पति टेबल पर ग्राहकों को देखते थे और सब्जी के साथ साथ हमारा अचार का बिज़नेस धीरे धीरे बढ़ने लगा| यह सिलसिला पांच साल तक चलता रहा। टेबल से ही हमें बहुत सारे अचार का आर्डर मिलने लगा|

Sri Krishna pickle pvt.limited

सब्जियां हम अपने खेत में खुद से उगाते थे और अचार भी हम अपने घर में ही पूरा तैयार करते थे। घर में बना अचार लोगो को बहुत पसंद आया जिससे हमारी अचार की बिक्री बहुत बढ़ गयी इससे घर भी अच्छे से चलने लगा और पैसे भी आने लगे। इसके बाद बहुत सारे दुकानों में भी अचार जाने लगा जिससे हमारी आमदनी बढ़ने लगी और दुकानों से भी हमें बहुत सारा आर्डर मिलने लगा  

इसके बाद हमारे पति ने कहा की अब हम अपनी कंपनी खोलेंगे और अपने अचार को अपने ब्रांड के नाम से बेचेंगे| उन्होंने कंपनी खोलने के लिए कई लोगो से बात की साथ ही साथ फ़ूड लाइसेंस के लिए भी बात की| इन सभी कामो में भी अच्छा वक्त लग गया लेकिन हमें फ़ूड लाइसेंस मिल गया |

“लाइसेंस मिलने के बाद हमने श्री कृष्णा पिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की शुरूआत की। एक दुकान किराए पर ली और हम वहां से अपने अचार को पैक करके बेचने लगे। मैंने आसपास रह रही बहुत सारी महिलाओं को भी साथ जोड़ लिया, उन सबको अचार बनाने की ट्रेनिंग दी। धीरे-धीरे हमारा काम बढ़िया चलने लगा। आज हमारे पास करीब करीब 152 प्रोडक्ट है जो मार्केट में हम बेचते है|

आज हमारी 7 कंपनियां हैं जो हरियाणा और दिल्ली में हैं। 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का टर्नओवर है। अचार के साथ ही मसाले, जूस, तेल, आटा भी हम तैयार करते हैं। हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। मुझे किसान सम्मान से लेकर नारी शक्ति पुरस्कार तक मिल चुका है।”

अगर आप मेहनत एवं ईमानदारी से काम करते है तो आपका सपना जरूर पूरा होता है|
कृष्णा जी कहती है जो लोग खुद का कुछ करना चाहते हैं, उन्हें यही सलाह देना चाहती हूं कि अगर आपने कोई सपना देखा है तो उसके पीछे पड़े रहो। हार मत मानो। मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूँ लेकिन अपने बच्चो के साथ साथ पढ़ना सीखा और आज अपने कंपनी के सारे हिसाब किताब मै खुद ही देखती हूँ|

बहुत सारे अवार्ड मिले

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी कृष्णा जी को सम्मानित किया है| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कृष्णा जी को सम्मानित कर चुके है | इसके अलावे भी बहुत सारा सम्मान उन्हें मिल चूका है|

तो ये थी कृष्णा यादव जी की कहानी जो लोगो के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है| उन्होंने साबित कर दिया की अगर आप कोई भी काम मेहनत और ईमानदारी से करेंगे तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता|

दोस्तों आप भी इनके साथ मिलकर बिज़नेस शुरू कर सकते है और बहुत अच्छा मुनाफे के साथ बहुत बड़ा नाम और शोहरत पा सकते है| कृष्णा जी के पास बहुत ज्यादा अनुभव और बिज़नेस करने के बहुत सारे तरीके है जिन्हें सीखकर आप बहुत सारे नए नए बिज़नेस की शुरुआत कर सकते है|

ये सच्ची कहानी आपको कैसे लगी comment सेक्शन में जरुर लिखे आपके सलाह एवं सुझाव का स्वागत है|

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