Friday, September 24, 2021
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2 हज़ार की नौकरी छोड़कर शुरू की बांस की खेती, आज एक करोड़ है सालाना कमाई

खेती में मौसम एवं प्रकृति पर निर्भरता, पैसे लगाने और ढेर सारा मेहनत करने के बाद भी घाटे का सौदा बन जाता है जिसकी वजह से गांवो से शहरों की ओर पलायन लगातार जारी है| बहुत सारे युवा बड़े शहरों के फैक्ट्रियों में 5 से 10 हज़ार रुपए की नौकरी करने के लिए मजबूर हैं|

लेकिन अगर आप में जज्बा है, जूनून है दुनिया से कुछ अलग करने की चाहत है तो इसी जमीन से आप सालाना लाखो- करोडो रुपए कमा सकते है| आज हमारे देश के युवा ज्यादा पढ़-लिख कर, बड़ी बड़ी डिग्रियां लेकर भी खेती के क्षेत्र में आ रहे हैं और बहुत सारा पैसा के साथ साथ नाम और शोहरत भी कमा रहे है|

आज के इस ब्लॉग में हम आपको मिलबाने जा रहे है राजशेखर पाटिल जी से जो बांस की खेती कर सालाना करोड़ो रुपए की कमाई कर रहे है और खेती के  साथ साथ देश के किसानों को इसकी ट्रेनिंग बिलकुल फ्री में देते हैं|

Rajshekhar Patil
Rajshekhar Patil

राजशेखर पाटिल जी ने जब बांस की खेती करना शुरू किया था तो उनके परिवार के ऊपर 10 लाख रुपए का कर्ज था| बांस की खेती शुरू करने के बाद दूसरे साल ही सारा कर्ज उतार दिया|

राजशेखर पाटिल जी का जन्म महाराष्ट्र जिले के ओसमानाबाद के एक किसान परिवार में हुआ| उनके पिता खेती करते थे और उनके पास 30 एकड़ पुस्तैनी जमीन थी| राज शेखर पाटिल जी ने भी कोल्हापुर से कृषि विषय में स्नातक किया और नौकरी की खोज में निकल पड़े लेकिन कहीं नौकरी नहीं मिली| उनका इलाका देश के सुखाग्रस्त इलाकों में से एक था|

उनकी जमीन में खेती बहुत मुश्किल से होता था क्योंकि उस समय वहां न बिजली की सुविधा थी न पानी की सुविधा थी इसलिए उनके गाँव का नाम निपानी हो गया| “निपानी मतलब जहाँ पानी नहीं हो”

अन्ना हजारे से मिले जहाँ खेती और जल संरक्षण के बारे में सीखा

पाटिल जी ने पढाई के बाद कुछ सालों तक सरकारी नौकरी के लिए तैयारी की लेकिन कोई सरकारी नौकरी प्राप्त नहीं कर सके| इसके बाद उन्होंने प्राइवेट नौकरी भी करनी चाही लेकिन वह भी नहीं मिली| उसके बाद वे अन्ना हजारे के पास रालेगन सिधी गए जहाँ पाटिल जी को मिट्टी और पानी के सरंक्षण का काम दिया गया| इस काम के लिए 2000 रुपए हर महीने मिलते थे| वहां उन्हें मिट्टी और जल सरंक्षण के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला| उन्होंने अन्ना हजारे के लिए 22 गांवों में 4 से 5 सालों तक मिट्टी और जल सरंक्षण का काम किया|

बीमार पिता की वजह से गाँव लौटना पड़ा

अचानक एक दिन गाँव से खबर आई की पिताजी को पैरालिसिस हो गया है| इसकी वजह से उन्हें गाँव लौटना पड़ गया| गाँव के खेतों में कुछ हो नहीं रहा था सिर्फ कर्ज पर कर्ज बढ़ता जा रहा था, कोई आमदनी नहीं हो रही थी| जिसकी वजह से ही पिताजी की तबियत ख़राब हो गयी थी तो माँ ने कहा सब कुछ छोड़कर घर आ जाओ|

इसके बाद पाटिल जी ने सोचा अब जो भी करना है यहीं करना है| उन्होंने खेती करने की सोची लेकिन गाँव में पानी का स्तर ठीक नहीं था तो पाटिल जी ने अपने पास के ही वाटरमैन नाम से जाने वाले राजेंद्र सिंह जी से मदद लिया, और अपने गाँव के 10 किमी लम्बे नाले को साफ़ कराया ताकि उसमे बरसात की पानी को सरंक्षित कर खेती की जा सके|

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पाटिल जी ने जो दुसरे गांवों के सुधार के लिए काम किया था उसे अपने गाँव में भी किया और धीरे धीरे उनके गाँव में भी पानी की स्थिति सुधरने लगी| उन्होंने सोचा एक बार मन लगाकर खेती करते है|

पाटिल जी को खेती से सम्बंधित किताबे पढने का शौक था जिसकी वजह से खेती के बारे में अच्छी Knowledge थी| उन्हें पता था की प्राकृतिक, जैविक एवं रासायनिक खेती कैसे करते है| लेकिन जैविक एवं रासायनिक खेती करने के लिए पैसे थे ही नहीं इसलिए उन्होंने प्राकृतिक ढंग से खेती करना शुरू किया|

उन्होंने अपने खेतों में नारियल, चीकू, आम आदि फलों के पेड़ लगाए तथा कुछ सब्जियां भी लगा दी| इसके बाद ये समस्या आई की बहुत सारे जानवर खेतो में घुस जाते एवं इन फसलों को बर्बाद कर देते थे|

पाटिल जी के पास उस समय खेतों के चारों तरफ बाड़ लगाने के पैसे नहीं थे| उसी समय उन्हें किसी ने बताया की सरकारी नर्सरी में फ्री में बांस के पेड़ मिल रहे हैं| तो उन्होंने सोचा चलो खेतो के किनारे में बांस का पेड़ लगाने से बांस क पेड़ घना हो जायेगा और वो बाड़ का काम करेगा| यही सोचकर वे नर्सरी गए और वहाँ से बांस के 40 हज़ार पौधे ले आये और खेतो के चारों तरफ लगा दिए|

पाटिल जी ने ऐसे शुरू की बांस की खेती

3 साल के बाद जब बांस बहुत बड़े बड़े हो गए तो आस पास के लोग उनसे बांस को खरीदने के लिए आने लगे| पहले साल ही उन्होंने 1 लाख रुपए के बांस बेच दिए| इसके बाद अगले साल उन्होंने 10 लाख रुपए के बांस बेच दिए| इसके बाद बांस के बड़े बड़े व्यापारी उनसे संपर्क करने लगे| तब पाटिल जी को पता लगा की बांस की मार्किट में कितनी डिमांड है|

उसके बाद राजशेखर पाटिल जी ने बांस की खेती और बांस की डिमांड के बारे में research किया तो उन्हें पता चला की हमारे भारत देश में बांस की डिमांड इतनी है की यहाँ के किसान पूरा नहीं कर पाते है और सरकार को बांस बाहर के देशों से मंगाना पड़ता है|

200 तरह के बांस की खेती

बांस की खेती में इतना मुनाफा देख कर राज शेखर पाटिल जी बहुत खुश हुए और अपने सारे खेत में वे बांस की खेती शुरू कर दी| गाँव के लोग उन्हें पागल कहते थे लेकिन तब तक पाटिल जी को पता चल चूका था की बांस की भारतीय बाज़ार में कितनी डिमांड है और पूरा करने वाला कोई नहीं है|

Bamboo

इसी खेती की वजह से उन्होंने 24 एकड़ जमीन और खरीद ली और वे अब 54 एकड़ में बांस की खेती करते है तथा अब वे बांस की खेती से ही सालाना 1 करोड़ की कमाई करते है|

पाटिल जी ने देश – विदेश घूम कर बांस की 200 किस्में अपने खेतो में लगा रखी है|

बांस की खेती कैसे शुरू करें?

पाटिल जी बताते है की बांस की खेती के लिए सामान्य जमीन जिस में घास उग सकती है वह पर बांस की खेती बड़े आराम से की जा सकती है| इसके लिए बहुत ज्यादा पानी की जरुरत नहीं पड़ती है| जुलाई में बांस की रोपाई शुरू होती है| बांस को तैयार होने में 3 साल का समय लगता है| अच्छे vairety के बांस का चयन कीजिये| अलग अलग बांस का रेट भी अलग अलग होता है| बांस का पौधा 4 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है| इसके बीच में किसी और भी फसल की खेती की जा सकती है| बांस के एक पेड़ से 10 से 200 बांस मिलते है और 1 की कीमत आपको 20 रुपए से लेकर 100 रुपए तक मिल सकती है|

आप अपने आस पास की नर्सरी से बांस के पौधे ला कर बांस की खेती शुरू कर सकते है| बांस की खेती शुरू करने के लिए National Bamboo Mission की मदद ली जा सकती है|

किसानों को देते है फ्री में ट्रेनिंग, सरकार से मिल चूका है कई सम्मान

बांस की खेती के साथ साथ पाटिल जी किसानो को फ्री में ट्रेनिंग भी देते हैं| उन्हें नागपुर में आयोजित Agro Vision Conference में भी बुलाया गया जहाँ किसानों को संबोधित करते हुए पाटिल जी ने कहा की अब सभी किसानो को बांस की खेती ज्यादा पैमाने पर करनी चाहिए| क्योंकि इसका बिज़नेस करके आप बहुत अच्छा मुनाफा कमा

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सकते हैं| वे Indian Bamboo Mission के advisor के रूप में भी काम कर चुके है| उन्हें सरकार की तरफ से कई पुरस्कार एवं सम्मान मिल चुका है| लेकिन पाटिल जी को सबसे ज्यादा ख़ुशी किसानों की मदद करने में मिलती है|

बहुत सारे किसान आते है पाटिल जी के पास

राजशेखर पाटिल जी के बांस की खेती को देखने और उनसे इसके बारे में जानने वाले किसानो की भीड़ लगी रहती है| वे फ्री में इसकी सारी जानकारी किसानो को देते हैं| इसके अलावा लोगो की डिमांड पर बांस की नर्सरी भी तैयार किया जहाँ से आप बांस के पौधे लेकर अपना बिज़नेस शुरू कर सकते हैं|

आजकल शहरों में बांस से बने प्रोडक्ट की डिमांड बढती जा रही है| लोग अपने गार्डन की बाड़ लगाने के लिए इसका उपयोग करते हैं| इसके अलावा लोग अपने घर को सजाने के साथ साथ बांस का फर्नीचर भी इस्तेमाल करते हैं|

आज के ज़माने में बांस से बहुत सारा प्रोडक्ट बनता है जिसकी वजह से बांस की डिमांड मार्किट में बहुत ज्यादा है| राजशेखर पाटिल जी का कहना है की किसानों को पारम्परिक खेती से हटकर बांस की खेती के बारे में भी सोचना चाहिए|

हर किसान की मदद के लिए तैयार

राजशेखर पाटिल जी अपने बांस के बिज़नेस एवं नर्सरी के बिज़नेस से करोड़ो रुपए कमाते है| वह अपने गाँव के साथ साथ सभी किसान भाई की मदद के लिए तैयार रहते है| उन्होंने किसानो के लिए youtube channel Rajshekhar Patil (यहाँ पर क्लिक करके उनके चैनल पर जा सकते है) भी खोला है जहा बांस की खेती से सम्बंधित विडियो डालते रहते हैं| आप उनके चैनल पर जाकर विडियो देख सकते है तथा उनसे संपर्क कर (9860209283) बांस की खेती से सम्बंधित कोई भी जानकारी ले सकते हैं| 

दोस्तों आपको राजशेखर पाटिल जी का ब्लॉग कैसा लगा, जरुर बताएं तथा आप किसी भी बिज़नेस के बारे में ब्लॉग पढना चाहते है तो जरुर comments करें हम जल्द से जल्द आपकी डिमांड पूरी करने की कोशिश करेंगे|

आपका बहुत ज्यादा प्यार हमें मिला है, इसी तरह से अपना प्यार बनाए रखे| आप इस ब्लॉग को अपने Family, Friends को share करें ताकि वो भी जाने जिन्दगी किसी की भी कभी भी बदल सकती है|

ब्लॉग पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् !

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